क्या वैदिक ज्योतिष पूरी तरह गणित की गणनाओं पर आधारित है

 क्या वैदिक ज्योतिष पूरी तरह गणित की गणनाओं पर आधारित है
वैदिक ज्योतिष पूरी तरह गणित की गणनाओं पर आधारित है। ग्रहों, नक्षत्रों व तारा समूहों का पृथ्वी पर रह रहे जीवों पर कैसा प्रभाव पड़ता है इसके बारे में भविश्यवाणी की जाती है। गणित में शून्य का अपना जैसे कोई मूल्य नहीं वह अन्य संख्याओं के साथ मिलकर उसकी वैल्यू बढ़ा देता है। मानव जीवन कितना है इसके बारे में गणना की गई है कि यह सामान्य रूप से 100 साल तक जी सकता है क्योंकि इतनी आयु मानव पहले भोगता ही था लेकिन अब यह आयु औसत 65 साल हो गई है। गणना के आधार पर हम कहते हैं कि यह मकान 100 साल तक खड़ा रहेगा लेकिन प्राकृतिक आपदा बाढ़ या भूकम्प आने पर मकान गिर जाता है।

ज्योतिष का आधार गणनाएं हैं जो सटीक व वैज्ञानिक हैं, यह तो हम मान सकते हैं। लेकिन गणनाओं के आधार पर भविष्यवाणी सटीक भी बैठती है और कई बार चूक भी हो जाती है, यहां अनुभव काम करता है। एक फैक्टरी से निकले 1000 बल्वों  की गारंटी 1 साल दी जाती है तो इसमें से 90 प्रतिशत गारंटी पर ठीक बैठते हैं और 10 प्रतिशत नहीं लेकिन कम्पनी की गारंटी को फिर भी कोई चैलेंज नहीं करता। ऐसे एक 25 साल अनुभवी डाक्टर व नए बने डाक्टर कार्य में परिणाम अलग हो जाते हैं या होने की सम्भावना ज्यादा रहती है। हर वस्तु की गणना के अनुसार भविष्यवाणी की जाती है लेकिन वह वस्तु अपने आप में स्वतंत्र होती है।

 मान लो मैं किसी के जीवन के बारे में उसके ग्रहों, गणना व अपने अनुभव आधार पर भविष्यवाणी करता हूं जो कुछ नियमों में बंधी है लेकिन जिसके बारे में मैं भविष्वाणी कर रहा होता हूं वह उन नियमों में नहीं बंधा होता। मैं उसकी आयु 70 साल बताता हूं क्योंकि ऐसी गणना वाले हजारों लोग 90 प्रतिशत तक पूरी आयु भोग कर गए लेकिन 10 प्रतिशत किन्ही अन्य कारणों से बीच में ही सांस छोड़ गए। यहां कर्म का आधार भी सामने आता है। 

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