शनि की साढ़ेसाती किसे कहते हैं? शनि साढ़ेसाती के क्या उपाय हैं?

शनि की साढ़ेसाती किसे कहते हैं? शनि साढ़ेसाती के क्या उपाय हैं

शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। शनि को यम, काल, दु:ख, गरीबी तथा मंद भी कहा जाता है।  किसी भी परेशानी, संकट, दुर्घटना, आर्थिक नुकसान, अपमान आदि के लिए इसका कारण हम शनि की साढ़ेसाती को मान लेते हैं।शनि देव हर इंसान को उसके कर्मों के हिसाब से शुभ अशुभ फल प्रदान करते हैं। शनि की साढ़ेसाति साढ़े सात साल तक चलती है इसीलिए इसे साढ़ेसाति कहा जाता है। शनि की साढ़ेसाति हर व्यक्ति के जीवन में एक बार या इससे अधिक बार जरूर आती है। 
शनि ग्रह को एक राशि से दूसरी राशि में जाने का जो समय लगता है वह अढ़ाई साल का होता है। एक राशि से दूसरी राशि में विचरऩ करते हुए शनि जातक की नाम राशि या लग्न राशि में रहता है। इस प्रकार उस राशि, उससे अगली राशि व बाहरवें स्थान की राशि पर साढ़े साती का प्रभाव होता है। शनि को 3 राशियों में गुजरने के लिए साढ़े सात साल का समय लग जाता है। सभी 12 राशियों के एक चक्कर काटने में उसे 30 साल का समय लग जाता है। शनि का गोचर जब आपकी जन्म कुंडली में बैठे चंद्रमा से बारहवें भाव में हो साढ़ेसाती आरंभ हो जाती है।शनि की साढ़े साती इसी को कहा जाता है। शनि देव सूर्य पुत्र हैं।  यमराज इनके भाई हैं। यमलोक के अधिपति यमराज हैं और वहां शनि  दंडाधिकारी के तौर पर नियुक्त हैं।
शनि की  साढ़े साती के 3 चरण होते हैं-
 
 शनि की  साढ़े साती के 3 चरण होते हैं। शनि की साढ़े साती का पहला चरण धनु, वृषभ, सिंह राशि वाले लोगों के लिए कष्टकारी होता है । दूसरा या मध्य चरण सिंह, मकर, मेष, कर्क, वृश्चिक राशियों के लिए कष्टकारी होता  है तथा तीसरा चरण मिथुन, कुंभ, तुला, वृश्चिक, मीन राशि के लिए कष्ट देने वाला  होता है।
क्या होती है शनि की ढैय्या
शनि का एक राशि से दूसरी राशि में गोचर को ही ढैय्या कहते हैं। जब साढ़े साती प्रारंभ होती है तो सबसे पहले उसकी ढैय्या चलती है।

 प्रभावशाली उपायों से शनि साढ़ेसाती के प्रभाव को कम किया जा सकता है -

 - शनिवार को कांसे, तांबे के दीपक में तिल या सरसों का तेल भरकर ज्योति जलाएं। 

-  य़दि आप अपना आचरण ठीक रखते हैं तो शनि का प्रभाव शुभ रहेगा। 

- हर शनिवार को उड़द की दाल को घर में बनाएं और हो सके तो व्रत भी रखें।

- यदि आप अपने माता-पिता को पूरा सम्मान देते हैं तो शनि के शुभ परिणाण मिलते हैं। 

- शिनवार को एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भर लें और उसे पिंगलवाड़े या डकोत को दान कर दें। 

- शनि के मंत्र ॐ शं शनिश्चरायै नमः का जाप 3 माला जाप करें तो शनि के प्रभाव कम होंगे। 

- सरसों के तेल का दीया हर शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं। पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा लगातार 40 शनिवार करें।

-  प्रत्येक शनिवार को भगवान शनि की पूजा करें इससे साढ़े साती का प्रभाव कम होगा

- हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ रामबाण की तरह काम करता है। 
 
 -कुंडली में शनिदोष होना शुभ नहीं माना जाता है। शनि दोष से पीड़ित व्यक्ति अक्सर समस्याओं से घिरा रहता है।  शनिदोष दूर करने के लिए उपाय हैं, जिन्हें करके भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। 
सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:।
मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।। 

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

ॐ प्रां प्रीं प्रौ सं शनैश्चराय नमः।

ॐ नमो भगवते शनैश्चराय सूर्यपुत्राय नमः।
-शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। शिव सहस्त्रनाम या शिव के  मंत्र षडक्षर मन्त्र ‘ॐ नम: शिवाय’  का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है।
-महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें व भगवान शिव की पूजा करें।

-काला चना, सरसों का तेल, लोहे का सामान एवं काली वस्तुओं का दान करें।
-शनिवार सरसों या तिल के तेल को शनि देव पर चढ़ाएं।

साढ़े साती के दौरान आपको सावधान रहना होगा -

 - वाहन ध्यान से चलाएं।

- बेकार की बहसबाजी में नहीं पड़ना चाहिए।

- साढ़ेसाती के दौरान रात में अकेले यात्रा नहीं करनी चाहिए।

- शनिवार और मंगलवार को शराब का सेवन न करें।

- साढ़ेसाती के दौरान शनिवार और मंगलवार को काले रंग का सामान खरीदने से परहेज करें।


2020 में शनि का गोचर फल
शनि का गोचर इस वर्ष 2020 में धनु राशि से अपनी स्वराशि में यानि मकर में 24 जनवरी को हुआ। फिर 11 मई 2020 से 29 सितंबर 2020 तक शनि मकर राशि में वक्री अवस्था में गोचर करेगा। शनि 27 दिसंबर 2020 को अस्त भी हो जाएंगे।

साल 2020 में शनि की साढ़ेसाती किस राशि पर
धनु और मकर राशि में पहले से ही शनि की साढ़े साती का प्रभाव चल रहा था। अब कुंभ राशि पर भी शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरु हो जाएगा। वृश्चिक राशि से शनि की साढ़ेसाती का अंत हो जाएगा।

धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती

2020 में शनि के मकर राशि में गोचर से धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण रहेगा। अंतिम चरण होने की वजह से धनु राशि के जातकों पर अब पहले की मुकाबले परेशानियां कम रहेगी। धनु राशि के जातकों पर होगा सकारात्मक प्रभाव नौकरी में अब पहले के मुकाबले ज्यादा अच्छे प्रस्ताव मिलेंगे। व्यापार करने वालों जातकों पर भी इस गोचर का अच्छा परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

शनि गोचर 2020 का मेष राशि पर क्या प्रभाव होगा 
मेष शनि ग्रह की नीच राशि है। 2020 में शनि का गोचर मेष राशि से दसवें घर में गोचर करेगा। मेहनत और संघर्ष बहुत बढ़ जाएगा। अप्रैल तक का समय नए कार्य के लिए शुभ है। 11 मई को शनि का वक्री होना आपके लिए शुभ नहीं होगा। आपके काम में रुकावट आ सकती हैं। 
साल 2020 में वृष राशि पर शनि की साढ़ेसाती
नए वर्ष में वृष राशि वालों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या का कोई प्रभाव नहीं होगा।

शनि गोचर 2020 के प्रभाव से वृष राशि वालों का काम-काज
 लाभ के आसार कम, सब्र और धैर्य से ही काम करें। प्रमोशन के बारे में शनि का गोचर अभी और इंतज़ार करवायेगा। 

शनि खुद की मकर राशि में करेगा प्रवेश

2020 में शनि वक्री होगा, लेकिन राशि नहीं बदलेगा यानी पूरे साल ये ग्रह मकर राशि में ही रहेगा। शनि सोमवार, 11 मई को वक्री होगा। मंगलवार, 29 सितंबर को शनि फिर से मार्गी हो जाएगा। 

किन राशि पर शुरू होगी शनि की साढ़ेसाती
 23 जनवरी के बाद वृश्चिक राशि की साढ़ेसाती खत्म होगी, वृषभ और कन्या राशि का ढय्या उतरेगा। मकर राशि में शनि का प्रवेश होंगे। कुंभ राशि पर साढ़ेसाती शुरू हो होगी।  मकर राशि पर दूसरा और धनु राशि पर अंतिम ढय्या रहेगा।इसके बाद मिथुन और तुला राशि पर शनि का ढय्या शुरू हो जाएगा।
धनु,मकर, कुम्भ राशियों पर साढ़ेसाती कैसा होगा असर 
धनु राशि- इस राशि साढ़ेसाती का अंतिम ढय्या होने के कारण उतरती हुई साढ़ेसाती धनु राशि के लिए लाभ देकर जाएगी। 
मकर राशि- इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा ढय्या होने के कारण इन लोगों को कड़ी मेहनत करनी होगी। जल्दबाजी में कोई काम न करें।
कुंभ राशि- इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो रही है। इनको विशेष सावधानी रखनी होगी, शनि लाभदायक रहेगा। 
मिथुन,तुला  राशियों पर ढय्या का असर कैसा होगा
मिथुन राशि- 23 जनवरी के बाद इस राशि पर शनि का ढय्या शुरू हो रहा है। नौकरी में बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। 
तुला राशि- इस राशि पर भी शनि का ढय्या शुरू, शनि की ये स्थिति लाभदायक रहेगी। 
 मेष, वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक,सिंह और मीन राशियों के लिए कैसा रहेगा शनि का असर
मेष, वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक,सिंह और मीन राशियों के लिए  राशियों के लिए शनि का असर अलग-अलग रहेगा। मेष, वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक के लिए शनि की स्थिति शुभ रहेगी। सिंह और मीन राशि के लोगों को सावधान रहना होगा। 

Shani Gochar 2022: 2022 में शनि मकर राशि में रहेंगे. 29 अप्रैल 2022 को अपनी राशि बदलेंगे। शनि को अपनी राशि बदलने में करीब अढाई साल का समय लग जाता है। शनि का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण माना जाता है। शनि का इसका प्रभाव सभी राशि के लोगों पर पड़ता है। 5 जून 2022 में शनि वक्री हो जायेंगे। इसके बाद अपनी उल्टी चाल चलते जाएंगे और अपनी पिछली राशि मकर में फिर से गोचर करने लगेंगे। 17 जनवरी तक शनि इसी राशि में  रहेंगे। 

 

2022 में किन राशियों पर रहेगी शनि ढैय्या तो किन पर शनि साढ़े साती- शनि साढ़े साती 2022: जनवरी से लेकर अप्रैल तक धनु, मकर और कुंभ वालों पर शनि साढ़े साती रहेगी।  29 अप्रैल को जब शनि अपनी राशि बदलेंगे तो धनु राशि वालों को शनि साढ़े साती से छुटकारा मिल जाएगी। मीन राशि वालों पर ये महादशा शुरू हो जाएगी।  मकर और कुंभ वालों पर भी शनि साढ़े साती रहेगी। 12 जुलाई से लेकर 17 जनवरी 2023 तक शनि मकर राशि में गोचर रहेंगे।  शनि के वक्री होने के कारण इस अवधि में मीन वालों को शनि साढ़े साती से राहत मिल जाएगी।  धनु वाले एक बार फिर से शनि की दशा की अंदर में आ जायेंगे।




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