सूर्य की महादशा का फल

ग्रहों की महादशाओं का जातक के जीवन में बहुत ही प्रभाव पड़ता है। ग्रहों की महादशा तथा अंतरदशा  से ही शुभ व अशुभ घटनाओं के बारे में जाना जा सकता है। जन्म कुंडली बनाकर ग्रहों की महादशा व अंतरदशा बना लेनी चाहिए। जन्म कुंडली में 3 प्रकार की दशाएं दी गई होती हैं। ये हैं विशोंतरी दशा, अष्टोत्तरी तथा योगिनी महादशा। यहां केवल सूर्य की विशोंत्तरी महादशा का ही वर्णन करेंगे।

किसी भी ग्रह या सूर्य की महादशा का मूल आधार यह है कि जिस प्रकार यह जन्म कुंडली में शुभ व अशुभ होगा उसी प्रकार का ही अपनी महादशा में फल भी प्रदान करेगा। किस भाव,राशि आदि में यह ग्रह शुभ अथवा अशुभ है, पहले यह जान लेना जरूरी है, तभी महादशा का भी सटीक विचार हो पाएगा।  


सूर्य की महादशा का फल- यदि सूर्य शुभ एवं शक्तिशाली हो तथा 3-6-8-12 भावों में विराजमान न हो तो सूर्य महादशा में तरक्की,पुत्र प्राप्ति, नौकरी का मिलना, व्यापार में लाभ,स्वास्थय अच्छा, पिता को सुख मिलता है और अधिकारियों से लाभ मिलता है। मान-सम्मान मिलता है, यश की प्राप्ति होती है। यदि सूर्य अशुभ स्थिति में है तो स्वास्थ्य खराब,नेत्र, हृदय, पेट रोग, चोट की आशंका, बदनामी, अपयश,नौकरी में गड़बड़, व्यापार में घाटा, आंखों की नजर खराब होना आदि विकार हो सकते हैं। किसी बड़े अधिकारी व पिता से झगड़ा या मनमुटाव भी हो सकता है। 

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