विवाह कब होगा ? when will I get Married?


विवाह कब होगा ? When will i Get Married?

युवावस्था में जब बच्चे पहुंच जाते हैं तो माता-पिता उनके लिए योग्य वर- व वधू की तलाश करनी शुरु कर देते हैं। यदि प्रेम संबंधों का मामला हो तो हर प्रेमी व प्रेमिका अपने अपने प्यार को पाने के लिए कई प्रकार के उपाय करते हैं। प्रेम के मामले में कई बार सफलता मिलती है और कई बार असफलता का भी सामना करना पड़ता है। विवाह के बाद सुख-शांति तथा संतान सुख हर कोई चाहता है। 
मेरी शादी कब होगी? , किसी उम्र में मेरी शादी होगी? , मेरा पति कैसा होगा?, मेरी विदेश में शादी कैसे होगी?, मुझे सुशील पत्नी कब व कैसे मिलेगी?, मेरी पत्नी कैसी होगी?, मेरी शादी लव मैरिज होगी या अरेंज? आदि प्रश्नों का उत्तर हम आपको ज्योतिष के आधार पर देंगे। आपको बताएंगे कि कौन कुंडली का घर शादी के लिए देखा जाता है, कौन से ग्रह शादी के लिए उत्तरदायी होते हैं। 

विवाह संबंधी जानने के लिए ग्रहों व भावों को जानना होगा। तभी स्पष्ट होगा कि विवाह होगा या नहीं। विवाह के बाद जीवन सफल होगा कि नहीं। विवाह के बाद  सुख मिलेगा कि नहीं। विवाह के बाद मतभेद, मानसिक परेशानी, तलाक तथा वाद-विवाद का भी सामना करना पड़ सकता है। 
विवाह से संबंधित तथा गृहस्थ सुख-दुख हेतु ये भाव बड़े ही मह्त्वपूर्ण हैं। सभी भावों का बहुत योग्यदान होता है इसलिए इन भावों पर विचार करना जरूरी है।

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ये भाव हैं- 2-4-5-7-8-11-12वां ।
दूसरा भाव- यह भाव कुटुम्ब, आर्थिक स्थिति दिखलाता है।
चौथा भाव- घर का वातावरण, परिवेश तथा घर का सुख बताता है।
पांचवां भाव- संतान, प्रेम, पति-पत्नी का प्यार भी दिखलाता है।
सातवां भाव- विवाह, सांझेदारी, पति-पत्नी से संबंधित है।
आठवां भाव- गुप्तांगों एवं काम शक्ति से संबंधित है।
ग्यारहवां भाव- इच्छाएं मनोकामनाएं पूरा होने से संबंधित हैं।
बाहरवां भाव- शय्या अथवा रात्रि सुख तथा पहली संतान का सूचक है।

ये,सभी भाव किसी न किसी प्रकार से सीधे ही विवाह, गृहस्थ सुख, संतान,प्रेम तथा इच्छा पूर्ति से संबंधित हैं। जन्म कुंडली में इन भावों की स्थिति, इन भावों के स्वामी ग्रहों की स्थिति तथा इनपर पड़ने वाली अशुभ तथा शुभ दृष्टि परखने से ही विवाह संबंधी, गृहस्थ, सुख, शांति, निराशा आदि जाने जा सकते हैं।
भावों के साथ-साथ विवाह के सूचक व कारक ग्रह  के बारे में भी विचार करना जरूरी है।
1.शुक्र विवाह, गृहस्थ, सुख, पत्नी, प्रेम, काम तृप्ति आदि सभी घटनाओं के लिए शुक्र ग्रह कारक है। स्त्री के लिए यह कार्य मंगल को दिया गया है। मंगल ग्रह स्त्री की काम उत्तेजना, काम प्रवृति को दिखलाता है। 
2. चंद्र तथा बुध मन स्थिति को प्रकट करते हैं। यदि ये ग्रह बुरे ग्रहों से प्रभावित हों अथावा पारस्परिक  दृष्टि ही बुरी हो तो शांति के स्थान पर अशांति व तनाव पैदा करते हैं।
3. गुरु पुत्र कारक, संतान कारक तथा वृद्दि का कारक है। सूर्य उच्च पद प्राप्ति, यश, मान सम्मान दिखलाता है। इनकी ठीक स्थिति ही घरेलु शांति के लिए होती है। 
4. शनि,राहू केतु जैसे ग्रह यदि बुरे हैं तो विवाह से संबंधित भावों व ग्रहों को प्रभावित करते हैं। इन ग्रहों के होने से गृहस्थ, सुख आदि की कामना करना भारी भूल ही होगी। जैसे योग्य कलाकार सुर व ताल का सामंजस्य करके मधुर संगीत बिखेरता है इसी प्रकार भावों व ग्रहों का तालमेल करके विवाह, घरेलु सुख शांति, मानसिक परेशानी, चिंता आदि को भी जांचना चाहिए। इनके योगों से जो अनुभव जीवन में देखे गए हैं उन्हीं के संबंध में भी विचार किया जाएगा। 

विवाह होगा या नहीं?

विवाह होगा या नहीं यह देखने के लिए सातवां भाव, इसका स्वामी ग्रह, तथा इसकी स्थिति, चंद्र तथा शुक्र देखना चाहिए। यदि ये ग्रह 3-6-9-12 भावों में हों तथा विवाह के लिए अशुभ समझी जाने वाली राशियों (1-3-5-6 राशि) में हों और साथ ही 7-10-11 भाव अथवा राशियां ये राशियां शनि या अशुभ शुक्र के प्रभावाधीन हों तो विवाह की आशा कम ही होती है। यदि कहीं से आशा की किरण दिखाई दे तथा विवाह हो भी जाए तो सुख बहुत कम ही मिलता है और मन आशांत ही रहता है। 

1. चंद्र तथा शुक्र 2-4-8-12 तथा 9 राशि में हों। यदि ये राशियां भी सातवें पांचवें हों तथा चंद्र शुक्र भी इन राशियों में कुप्रभाव अधीन न हों तो विवाह शीघ्र होता है।

2. गुरु व शुक्र 2-7-11 भावों में हों तो विवाह ठीक समय पर होता है।
3. गुरु व चंद्र अथवा शुक्र व चंद्र अथावा दोनों 1-5-10-11 भावों में हो तो विवाह होता है।
4. यदि शुक्र 2-7-11 में अशुभ प्रभाव अधीन न हों तो भी विवाह होता है।
5. सातवें भाव का स्वामी ग्रह यदि ग्याहरवें भाव में बैठा हो तथा शुक्र भी दूसरे भाव में बैठा हो विवाह होना सुनिश्चित है।
6. यदि लग्न का स्वामी सातवें भाव में हो, और लग्न में शुक्र जैसा शुभ ग्रह  तथा विवाह कारक हो तो विवाह शीघ्र ही होता है।
  
प्रेम विवाह होगा या अरेंज विवाह
1.यदि पांचवां भाव व इसका स्वामी ग्रह किसी प्रकार भी लग्न अथवा सातवें भाव से संबंधित हो तो प्रेम विवाह होता है।
2. यदि सातवां भाव या सातवें भाव का स्वामी किसी प्रकार भी लग्न, पांचवे एवं ग्याहरवें भाव से संबंधित हो तो प्रेम विवाह होता है।
3. यदि सातवां भाव अथवा सातवें भाव का स्वामी किसी प्रकार भी लग्न, पांचवें एवं ग्याहरवें भाव से संबंधित हो जाए तो प्रेम विवाह होता है। यदि इस स्थिति पर कुप्रभाव हो तो विघ्न पड़ता है।












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