ज्योतिष ज्योतिष, वास्तु शास्त्र अंक शास्त्र एक विज्ञान


ज्योतिष ज्योतिष, वास्तु शास्त्र अंक शास्त्र एक विज्ञान

आज हर क्षेत्र में दम्भियों का बोलबाला है क्योंकि ये लोग अपने प्रभाव के कारण हर क्षेत्र में कब्जा जमाए बैठे हैं । विषय के असली ज्ञाता तो भीड़ में गुम से हो गए हैं। आज भारत में ही नहीं पूरे विश्व में लाखों की संख्या में
जाली डाक्टर, वकील, अध्यापक, नेता आदि घूम रहे हैं। ये लोग हर क्षेत्र में हैं। कोई अपने प्रभाव के बल पर लोगों को गलत सलाह दे  रहा है। इसका मतलब यह नहीं मूल विद्धा में कोई कमी है। ज्योतिष के क्षेत्र में भी ऐसा ही हो रहा है। दम्भी लोगों को गलत सलाह दे रहे हैं और लोग समझने लग जाते हैं कि ज्योतिष में ही कोई कमी है। कुछ लोग ज्योतिष का विरोध करते हैं। हम 100 प्रतिशत कह सकते हैं कि इन विरोधियों ने ज्योतिष के बारे में पढ़ा ही नहीं। आज की कोई भी इमारत 100 साल में ही खंडहर होने लगती है। 
आप इन प्राचीन मंदिरों को देख कर हैरान हो जाएंगे कि ईसा से लगभग हजारों साल पहले बने ये मंदिर आज के ज्यों के त्यों खड़े हैं। कैलाश मंदिर तो एक पूरी चट्टान को काट कर बनाया गया है। इसे बनाने में ही कई पीढिय़ां खप गईं। आप हैरान हो जाएंगे कि ये हमारे पूर्वजों का कमाल है कि आज दुनिया भर में ऐसे मंदिर दोबारा नहीं बनाए जा सके। उस समय वास्तु कला कितनी विकसित रही होगी। कितनी लोगों में श्रद्दा रही होगी। यदि कोई ज्योतिष व वास्तु को पढ़े तो वह जान जाएगा कि इस महान ग्रंथों की रचना करने वालों ने कितनी सूक्षमता से ग्रहों, नक्षत्रों का अध्ययन किया होगा। किस प्रकार गणित की गणना की होगी। हां आप यदि इसमें विश्वास नहीं रखते तो आपको कोई जबरन ऐसा करने के लिए नहीं कह रहा।
कुछ दिन पहले एक व्यक्ति का फोन आया कि मैं मंगलीक हूं और मैं जिससे प्यार करता हू व मंगलीक नहीं है। हम ज्योतिष में विश्वास नहीं रखते क्या ऐसा हो सकता है कि मंगलीक का कुछ उपाय कर सकें। हमने कहा कि आपको कौन बाध्य कर रहा कि ज्योतिष में विश्वास करो आप इस बात को रिजैक्ट कर दें किसी भी ज्योतिष से पूछोगे तो वह आपको मांगलीक ही कहेगा। ऐसे लोग विरोध भी करते हैं लेकिन जब अपने पर आती है तो कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहते। हमारे पास ज्यादातर वे लोग आते हैं कि खुलेआम ज्योतिष का विरोध करते हैं लेकिन जब अपनी बारी आती है तो सलाह लेने आते हैं। यह बहुत आसान है कि आप जब किसी बात पर विश्वास नहीं करते तो उसके लिए आपको सड़कों पर आकर धार्मिक किताबों को जलाने व देवताओं को गालियां निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। जब आप किसी दूसरी जाति को लोगों को गालियां सरेआम निकालते हैं तो आप मानसिक तौर पर नफरत के शिकार होते हैं। जब आप जाति व्यवस्था को नहीं मानते तो आपको इतना शोर मचाने की जरूरत नहीं होती। सिर्फ निर्णय ही काफी होता है। आपको पता ही नहीं चलता कि आप कब नफरत के शिकार हो गए। कई लोगों को उनके धार्मिक प्रचारक इतना डरा कर रखते हैं कि ज्योतिष शैतान का रूप है और इसे पढऩे वाला नर्क की आग में जलता है और धर्म से बाहर कर दिया जाएगा। इस प्रकार का डर बचपन से पीढ़ी दर पीढ़ी डाला जाता है और इसी भय के साथ पीढिय़ां खत्म हो जाती हैं और उनकी जगह नई पीढ़ी आ जाती है। पश्चिम में लोग जब इस भय से बाहर आए तो वे योग, ध्यान, संकीर्तन, नाच, भक्ती आदि के मुरीद हो गए और उन्होंने अपने ही कथित पुराने धर्म व धर्म प्रचारकों के काले चि_े समाज के आगे रख दिए।
जो लोग ज्योतिष अंगों का विरोध करते हैं वे स्वयं को अज्ञानी ही कहलवाते हैं। इनमें से जब कुछ लोग ज्योतिष का अध्ययन करते हैं तो फिर इस ज्ञान के समुद्र  में डुबकियां लगाने लगते हैं।
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