रोगों व कष्टों के नाश के लिए अचूक मंत्र


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मानव रोगों,कष्टों से घिर जाता है। अचूक मंत्रों का जाप करने से वह रोग मुक्त हो जाता है। हम इसके लिए आपको
लघु महामृत्युंजय-जप का विधान बताएंगे।
मंत्र- ओम जूं स: (जिसके नाम से किया जाए) पालय पालय स: जूं ओम।।
इस मंत्र का 11 लाख जप तथा एक लाख दस हजार दशांश का जप करने सब प्रकार के रोगों का नाश हो जाता
है। इतना न हो तो कम से कम एक लाख जप और साढ़े 12 जप करके यंत्र को हाथ में बांध देना चाहिए।
 श्री महामृत्युंजय कवच यंत्रम - भोजपत्र पर अष्टमगंध से यंत्र लिखकर गुगुल का धूप देकर पुरुष के दाहिने और
स्त्री के बाएं हाथ में बांध देना चाहिए। गोत्र, पिता का नाम पुत्र या पुत्री (रोगी) का नाम यथास्थान लिख देना चाहिए। साथ में रुद्राक्ष से महामृत्युंजय जप करते रहें।
दीर्घ आयु व रोग नाश के लिए महामृत्युंजय मंत्र
ओम हौं जूं स: ओम भूर्भव: स्व:। ओम त्रियम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम ् । उव्र्वारुकमिव बन्धनात ्  मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ् । स्व: भुव: भू: ओम। स: जूं हौं ओम ।
अर्थ- हम परमपिता त्रिअम्बकं (भगवान शिव) की अराधना करते हैं। वह परमसुखदायक व पुष्टिवर्धक हैं। जैसे तरबूज आदि फल  (पक जाने व स्वयं ही) बेल से छूट जाता है, वैसे ही पूर्ण आयु भोगकर में मृत्यु (जीवन से)
बिना कोई कष्ट भोगे छूट जाऊं परन्तु अमृतमयी जीवन से न छूटूं।
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